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Gresham's Law

 ग्रेशम का नियम का आशय ( meaning Of Gresham's Law )


ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम के शासनकाल में पुराने योगी से सिक्के प्रचलन में थे उन्होंने मुद्दा प्रणाली में सुधार करने की दृष्टि से नए एवं पूरे वजन के सिक्के चलन में डालें किंतु कुछ समय में ही महारानी ने देखा कि नए सिक्के चलन में नहीं है लोग पुराने सिक्के ही लेनदेन कर रहे हैं इस पर महारानी ने आर्थिक सलाहकार थॉमस ग्रेशम को बुलाया और इसका कारण पूछना ग्रेशम ने कुछ समय अध्ययन के पश्चात यह मत प्रकट किया कि घटिया मुद्रा की प्राकृतिक बढ़िया मुद्रा को चलन से बाहर कर देने की होती है यह ग्रेशम का नियम था ।

घटिया और बढ़िया मुद्रा से आशय ( Bad And Good Money Defined ) 

ग्रेशम के नियम को समझने से पहले यह जान लेना आवश्यक है कि अच्छी और बुरी मुद्राएं किसे कहते हैं ।

A. एक—धातुमान में : यदि एक धातु की प्रधान मुद्रा का चलन में है तो पूरे वजन वाली मुद्रा बढ़िया तथा कम वजन वाले मुद्रा घटिया या बुरी है ।

B. द्वि-धातुमान में :यदि दो धातुओं की प्रधान मुद्राएं चलन में है तो जिस धागे की कीमत बाजार में बढ़ जाती है उसका तुम की मुद्रा बढ़िया है अन्य धातुओं की मुद्रा घटिया है । 

C . धातु और पत्र के साथ-साथ चलन में : यदि पत्र मुद्रा और धात मुद्राएं साथ साथ चलती हो और धातु की मुद्रा प्रामाणिक मुद्रा हो तो पत्र मुद्रा व घटिया तथा धातु की मुद्रा बढ़िया है । 

D . केवल कागजी मुद्रा के प्रचलन की स्थिति में : यदि केवल कागज की प्रधान मुद्रा चलन में है तो नए और अच्छे नोट बढ़िया है और पुराने और फटे नोट घटिया मुद्रा है 

नियम का स्पष्टीकरण 

ग्रेशम का नियम में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि अच्छी और बुरी मुद्राएं साथ-साथ दोनों चलन में है तो बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है इसका आशय यह है कि बुरी मुद्रा चलन में बनी रहती है और अच्छी मुद्रा धीरे-धीरे चलन से गायब होने लगती है ।

नियम लागू होने के कारण अथवा अच्छी मुद्रा चलन से बाहर क्यों हो जाती है ?

A . जमा करना : जो व्यक्ति अपनी आय का एक भाग बचाकर अपने पास रखते हैं वह बढ़िया तथा पूरे वजन वाली मुद्रा ही जमा करना चाहते हैं क्योंकि वे अधिक मूल्यवान होती हैं इससे बढ़िया मुद्रा धीरे-धीरे चलन से बाहर होने लगती है । 

B. गलाना : लोगों की यह प्रवृत्ति होती है कि मैं अच्छी बावड़िया मुद्राओं को ही गर्ल आते हैं इसके 2 मुख्य भाग होते हैं ।

(i) लाभार्जन : जबकि सिद्धांत में कीमत बाजार में बढ़ जाती है तब उसकी मुद्रा को गला कर धूप में भेजने से लाभ कमाया जाता है ।

(ii) जेवर आदि के लिए : जो व्यक्ति सोने चांदी के जेवर बनवाना चाहते हैं वे अच्छी मुद्रा को गलवा कर जेवर बनवा लेते हैं क्योंकि ऐसी धातु को भाव बाजार में महंगा होता है मुद्रा को गलाने से जेवर कम मूल्य में ही बन जाता है |

(iii) विदेशी भुगतान : जब विदेशी भूख दांत हाथ में करना पड़ता है तब अच्छी मुद्राओं में ही भूदान कर दिया जाता है क्योंकि अच्छी मुद्रा में अधिक धातुएं होती हैं अतः भुगतान में कम मुद्रा ही देनी पड़ती है ।

ग्रेशम के नियम के क्षेत्र ( scope of gresham law ) 

ग्रेशम के नियम सभी व्यवस्थाओं में लागू होता है इसका अनुमान निम्नलिखित तत्वों से हो जाता है ।

एक धातु मान : एक धातु मान में ग्रेशम का नियम दो स्थितियों पर लागू होता है पहली स्थिति जब देश में केवल प्रमाणिक मुद्रा की चलन में हो तथा दूसरी स्थिति में जब प्रमाण क्यों सांकेतिक सिक्की एक साथ चलन में हो ।

जब केवल प्रमाणिक मुद्रा चलन में हो : ऐसी स्थिति में जो सिक्के पुराने पड़ गए हो 30 गए हो तथा जिनका वजन कम हो गया हो उन्हें बुरी मुद्रा माना जाता है तथा वे चलन में रहेंगे तथा नए मुद्रा जो कि पूरे वजन के होते हैं उसी के लोगों द्वारा जमा किए जाने के फल स्वरुप चलन से बाहर हो जाएंगे ।

जब प्रामाणिक एवं सांकेतिक सिक्के चलन में हो : ऐसी स्थिति में सांकेतिक सिक्के चलन में बने रहेंगे क्योंकि इनका मूल्य प्रमाणिक सिक्कों की तुलना में कम होता है तथा प्रमाणिक सिक्कों का मूल्य अधिक होने के कारण लोग उन्हें जला देंगे अथवा उनका संग्रह कर लेंगे आता है जिस सिक्के का आंतरिक मूल्य अधिक होता है उसे व्यक्ति से संग्रह कर लिया जाता है ।

द्वि-धातुमान ( Bi-Metallism ) 

जब किसी देश में दो धातुओं की मुद्राएं मुख्य रूप से चलन में होती हैं तो इस व्यवस्था को द्वि-धातुमान कहते हैं

द्वि-धातुमान ग्रेशम का नियंत्रण लागू होता है जब एक धातु के मूल्य में वृद्धि हो जाए इस स्थिति में जिस हाथ के मूल्य में वृद्धि हो जाती है उसकी मुद्रा चलन से बाहर हो जाती हैं मान लीजिए किसी देश में सोने और चांदी की प्रधान मुद्राएं चलन में है और सरकार ने सोने की मुद्रा चांदी की 15 मुद्राओं के समान घोषित कर दी है अब यदि बाजार में सोने की कीमत में वृद्धि हो जाए तो लोग टकसाल में 15 चांदी की मुद्रा के बदले में सोने की एक मुद्रा प्राप्त कर उसे गला लेंगे और उस मुद्रा से प्राप्त सोना बाजार में 16-17 मुद्राएं प्राप्त कर लेंगे इस प्रकार है सोने की मुद्राएं प्राप्त कर कल आते चले जाएंगे और लाभ अर्जित करते रहेंगे धीरे-धीरे सोने की मुद्राएं चलन से बाहर हो जाएंगे और चांदी की मुद्राएं चलन में बनी रहेंगी । 

पत्र मुद्रा मान को अपनाए जाने पर ( when paper money standard is adopted ) 

यदि किसी देश में कागज के नोट मुख्य मुद्रा के रूप में चलते हैं और धातु मुद्राएं सहायक के रूप में तो यह व्यवस्था पत्र मुद्रा मान कहलाती है पत्र मुद्रा में ग्रेशम के नियम का बहुत सीमित महत्व दिया गया है क्योंकि कागज के नोटों में अच्छी मुद्रा का विशेष प्रश्न नहीं उठता है इस पर निम्नलिखित दशाओं में नियम लागू हो सकता है । 

प्रतिनिधित्व और परिवर्तनीय पत्र मुद्रा का सह-चलन ( co circulation of Representatives inconvertible paper money ) 

परिवर्तनीय पत्र मुद्रा जिसके पीछे कुछ प्रतिशत को ही रखा जाता है प्रतिनिधि पत्र मुद्रा को जिसके पीछे शत-प्रतिशत कोष रखा जाता है चलन से बाहर कर देगी । 

परिवर्तनीय और अपरिवर्तनीय पत्र मुद्रा का सह-चलन ( co circulation of convertible and non convertible paper money ) 

अपरिवर्तनीय पत्र मुद्रा में कोई कुछ ना रखा जाने से इसमें जन सामान्य का विश्वास कम होता है और परिवर्तनशील पत्र मुद्रा की तुलना में बुरी मुद्रा होती है आता है परिवर्तनशील पत्र मुद्रा चलन से बाहर कर दी जाएगी | 

एक ही पत्र मुद्रा चलन में होने पर - कभी-कभी पत्र मुद्रा मान में ग्रेशम का नियम इस प्रकार लागू होता है कि लोग नए नोटों को जमा करने लगते हैं और पुराने मैं ले या फटे हुए निर्णय नोटों को चलन में रखते हैं । 

पत्र मुद्रा मान और धातु मुद्रा साथ साथ चलने पर ( when paper money and metallic money or simultaneously current ) 

जब किसी देश में कागज के नोट और धातु मुद्रा साथ-साथ प्रधान मुद्रा के रूप में चलते हैं तब लोग प्रायः धातु मुद्रा को जमा करने या गर्ल आने लगते हैं यहां तक कि संकट काल में धातुओं की सहायता से मुद्राएं भी जमा करने का संग्रह करने के कारण चलन से बाहर होने लगती है उपर्युक्त व्याख्या से स्पष्ट होता है कि ग्रेशम के नियम का क्षेत्र किसी एक मुद्रा मान तक सीमित नहीं है बल्कि इसका काफी विस्तृत क्षेत्र है परंतु यह स्मरणीय है कि अच्छी और बुरी मुद्राएं तुलनात्मक रूप में होती हैं एकांकी रूप में नहीं वही मुद्राएं जो कुछ परिस्थितियों में अच्छी मुद्रा होती है अन्य परिस्थितियों में बुरी मुद्रा का रूप भी धारण कर सकती हैं । 



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