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Elements of Banking


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मुद्रा के मूल्य में उतार-चढ़ाव : ( Fluctuations In Value Of Money )  

मुद्रा का परिणाम सिद्धांत  ( Quality Theory Of Money ) 

साख तथा साख का निर्माण  ( Credit And Credit Creation ) 



 वस्तु विनिमय मुद्रा का विकास ( barata and evolution of money ) 


वस्तु विनिमय मुद्रा का विकास प्रारंभिक मुद्रा के अविष्कार से पहले विद में वस्तुओं सेवाओं के प्रत्यक्ष रूप में किया जाता था इसे की वस्तुएं कहा जाता है इसमें एक वस्तु के साथ दूसरी वस्तु को अपनी आवश्यकतानुसार बदला जाता है प्रारंभ में यह आवश्यकता बहुत सीमित थी क्योंकि जनसंख्या बहुत कम होने के नाते मानो अपनी आवश्यकता की वस्तुओं को स्वयं निर्माण कर लेता था लेकिन जैसे-जैसे जनसंख्या दर बढ़ने लगी वैसे वैसे मानो अपनी आवश्यकता की वस्तुएं को बनाने में असमर्थ होते हैं इसलिए एक ही वस्तु का उत्पादन करने लगा तथा अपनी आवश्यकता की वस्तु दूसरे व्यक्ति से विनिमय करता था

वस्तु विनिमय की पद्धति :— वस्तु विनिमय का अभिप्राय दो पक्षों से है जो वस्तुओं तथा सेवाओं को अपनी इच्छा आवश्यकतानुसार पारस्परिक हस्तांतरण करते हैं 

वस्तु विनिमय का परिभाषा विभिन्ना अर्थशास्त्रियों ने अपने शब्दों में बताया है 

टॉमस के अनुसार :— एक वस्तु दूसरी वस्तु में प्रत्यक्ष विनिमय को ही वस्तु विनिमय कहा जाता है 

वस्तु विनिमय की को संभव बनाने वाले आवश्यक दशाएं ( conditions under which batter is possible ) 

अविकसित समाज :— जब आर्थिक विकास हमारा बिछड़े हुई अवस्था में हो तो लेन देन बहुत कम होता है तथा वस्तु विनिमय आवश्यक हो जाता है

सीमित क्षेत्र :— प्राचीन काल में ग्रामवासी राजनीतिक इकाइयों में होते थे जिससे कि पारस्परिक लेन देन वस्तु विनिमय के माध्यम से होता था

मुद्रा का कम प्रसार :— जब मुद्रा प्रसार बहुत कम हो जाता है तो लेनदेन वस्तु विनिमय की माध्यम से ही किया जाता है

परिवहन संसाधनों का अभाव :— देश में यदि परिवहन साधनों का अभाव होगा तो बैंकिंग सुविधा भी कम होगी जिससे कि वस्तु विनिमय की परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है।

मुद्रा में कम विश्वास :—यदि जनता को मुद्रा में कम विश्वास होगा तो वह मुद्रा में लेनदेन बहुत ही कम करेंगे और वस्तु विनिमय अधिक करेंगे ।

वस्तु विनिमय प्रणाली के गुण ( merits of of barter system )


अधिकतम संतुष्टि मिलना :— जब उत्पादक स्वयं की बनाई गई वस्तुओं को देकर अपनी आवश्यकतानुसार वस्तुओं को प्राप्त कर लेता है ।

राष्ट्रीय आय में वृद्धि :—जो व्यक्ति जिस कार्य अधिक होता है वह उसी का उत्पादन करता है और। एक वस्तु को अधिक उत्पादन करने से आय व्यक्ति को भी होगा और राष्ट्रीय  को भी 

दासता से मुक्ति :— वस्तु विनिमय प्रणाली से पहले व्यक्ति कुछ वस्तु के बदले अपना श्रम भेजने को बाध्य था जिसे दास प्रथा को प्रोत्साहन मिला वस्तु विनिमय के कारण दास प्रथा में शिथिलता आई ।

संबंधों में घनिष्ठता :— चुकी वस्तु इनमें से पाराशरी की लेनदेन होते थे जिससे दो व्यक्तियों के बीच में संबंध भी स्थापित हो जाते थे ।

कार्य क्षमता में वृद्धि :— इस प्रणाली में व्यक्ति केवल उन्हीं वस्तुओं का विनिमय करता था जिसमें वह कुशल हो।

राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन :— वस्तु विनिमय के अंतर्गत उत्पादक को अपनी वस्तु के बदले दूसरी वस्तु को प्राप्त करने के लिए बहुत दूर दूर तक जाना पड़ता था जिससे उनका पारस्परिक संपर्क बड़ा और छोटी-छोटी सामाजिक इकाइयां बड़ी-बड़ी राष्ट्रीय इकाई में परिवर्तित हो गई  

वस्तु विनिमय की कठिनाइयां (difficulties of barter system )


दोहरे संयोग का अभाव :— वस्तु विनिमय प्रणाली के लिए यह आवश्यक था कि ऐसे तो व्यक्तियों हो जो आपस में अपनी वस्तु देकर दूसरे की वस्तु लेने को तैयार यदि माना जाए तो उदाहरण हम ले सकते हैं यदि कोई व्यक्ति गेहूं के बदले चावल प्राप्त करना चाहता है तो उसे ऐसे व्यक्ति से मिलना चाहिए जो उसे चावल देकर गेहूं लेने के लिए तैयार हो जाए किंतु ऐसे साइयों का मिलना प्रायर बहुत कठिन होता था जिससे कभी-कभी वस्तु विनिमय असंभव हो जाता था।

विभाजकता की समस्या :— वस्तु विनिमय में एक और कठिनाई का अनुभव किया जाता था कभी-कभी दिन में करते समय आज सी वस्तुएं सामने आ जाती थी जो विभाजित नहीं हो सकती थी यदि उदाहरण के रूप में देखा जाए तो यदि एक घोड़ा 2 गायों के बराबर तय किया जाता है तो कोई व्यक्ति घोड़े के बदले दोस्त एकदम गाय नहीं ले सकता था क्योंकि यदि वह एक गाय ही गाय लेने का इच्छुक होता था तो उसे पूरे घोड़े से हाथ धोना पड़ता था और घोड़े के दो भाग करने से घोड़े का सवारी देने का गुण ही नष्ट हो जाता।

संचय में कठिनाई :— मनुष्य का सामान्य स्वभाव है कि वह अपनी आय का कुछ भाग भविष्य के लिए बचा कर रखता है वस्तु विनिमय प्रणाली में आएगी किसी भाग का संचय करने से निम्नांकित कठिनाइयां आ जाती थी ।

  1. वस्तु विनिमय के अंतर्गत जो वस्तुएं उपयोग में आती थी वह सभी निरंतर प्रयोग में ली जाने वाली वस्तुएं होती थी
  2. वस्तुओं में अनेक वस्तुएं ऐसी होती थी जो वर्षा गर्मी सर्दी आदि के प्रभाव से खराब हो जाती थी इसलिए उनको जमा करके रखना जोखिम का काम था
  3. वस्तुओं का संचय करने में अधिक स्थान की आवश्यकता पड़ती है अतः इस संचय करना बहुत खर्चीला था

विलंबित भुगतान में कठिनाई :— वस्तु विनिमय प्रणाली के अंतर्गत उधार के लेनदेन में कठिनाई होती थी क्यों किसी वस्तु का भविष्य मैं क्या मूल्य होगा यह निश्चित कर पाना बहुत कठिन होता था।

हस्तांतरण की कठिनाइयां :— वस्तु विनिमय में एक कठिनाइयां एक स्थान से दूसरे स्थान को करना संभव नहीं था क्योंकि वस्तुओं के हस्तांतरण बहुत असुविधाजनक था ।

मूल्य के सर्वमान्य माप का भाव :— अश्विन में नींबू लेकर एक सर्वमान्य माफ का अभाव होता था किसी एक सर्वमान्य माप के अभाव में दो वस्तुओं के बीच दिन में अनुपात बिन वेदर को निर्धारित करना बहुत कठिन होता था उदाहरण के लिए ले सकते हैं 1 मीटर कपड़ा लेने के लिए कितने किलोग्राम के लिए चयनित कर पाना बहुत कठिन हो जाता था क्योंकि कपड़े वाला अपने कपड़े का मूल्य अधिक लगाता था और गेहू वाला भी अपनी वस्तु का मूल्य अधिक लगाता था ऐसे में दोनों को अपनी अपनी वस्तु में बदलने में कठिनाई होती थी।।



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🔸 Books Details 🔸


Elements Of Banking :
by - Macleod, Henry Dunning.

Publication Date : 1908
Topics : Economics
Publisher :   Longmans, Green, & Co.- London.
Collection :  universallibrary
Contributor  :   None
Language   :   English
Addeddate :   2006-11-10 21:33:35
Barcode   :    0325522
Call number  :  25161

Digital Publishing Date : 24-02-2003
Identifier  : elementsofbankin025161mbp
Identifier-ark  :   ark:/13960/t07w67p8x

Page Layout :  First Page Right
Pages  :    320

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