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Taxation

प्रायजो किसी व्यक्ति राज्य विधिक संस्था से जो अभिवादन लिया जाता उसे कराधान कहते हैं कर पराया धन के रूप में लगाया जाता है किंतु यह धन के तुल्य श्रम के रूप में भी लगाया जा सकता है 

कर के प्रकार ( Types Of Tax ) :-

प्रत्यक्ष Direct Tax :- कर यह वह कर होता है जिसे जिस व्यक्ति पर आरोपित किया जाता है उसी से उसको वसूला जाता है अर्थात इस किसी भी स्थिति में अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है नोट प्रत्यक्ष कर की स्थिति में कारागार और करापात दोनों एक ही व्यक्ति पर होता है 

उदाहरण :

  1. आयकर Income Tax
  2. निगम कर Corporate Tax 

आयकर Income Tax :- यह वह कर होता है जो सरकार लोगों की आय पर आय में से लेती है यदि कहा जाए तो प्रत्येक के व्यवसाय और व्यक्ति कर देने या कर वापसी के लिए पात्र है और उन्हें हर साल एक आयकर रिटर्न फाइल करना होता है ।।

यह प्रत्येक व्यक्ति की आय पर भारत सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक कर है। आयकर कानून को शासित करने वाले उपबंध आयकर अधिनियम, 1961 में दिए गए हैं। भारत में यह प्रायः एक खास सीमा से अधिक आय वालों द्वारा अदा किया जाता है। उदाहरण के लिये वित्तीय वर्ष 2019-20 के भारत के बजट के प्रावधानों के अनुसार 5 लाख रूपये से अधिक आय वाले व्यक्ति आयकर दाताओं की श्रेणी में आएँगें। वरिष्ठ नागरिकों के लिए तीन लाख रुपए रखी गई है। कभी कभी एक खास रकम से ऊपर के आय वालों को अतिरिक्त कर भी देना होता है। मसलन वर्तमान पचास लाख रुपये सालाना से ज़्यादा आय वालों को 10% प्रतिशत सरचार्ज अतिरिक्त कर देना होगा।

आय का अर्थ :

भारतीय आयकर अधिनियम 1961 में आय को मुख्य रूप से पांच भागों या स्त्रोत के रूप में बांटा गया हैं जिसकी गणना आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार की जाती हैं| यह इस प्रकार हैं:

वेतन के रूप में आय :— इस स्त्रोत के तहत कर्मचारी को मिलने वाला वेतन, एन्युटी, पेंशन, ग्रेच्युटी, फीस, कमीशन, छुट्टी की जगह नकद भुगतान (लीव एनकैशमेंट), सालाना वृद्धि, प्रोविडेंट फंड में जमा रकम और कर्मचारी के पेंशन खाते में किया गया योगदान शामिल हैं|

मकान किराये से आय :— खुद के स्वामित्व वाले मकान के किराए से आमदनी को घरेलू संपत्ति से आय माना जाता है. एक से अधिक मकान होने की स्थिति में अगर मकान खाली है यानी उसमें कोई किराएदार नहीं है तो भी एक मकान को छोड़कर अन्य मकानों की अनुमानित आय आमदनी में जोड़ दी जाती है|

कारोबार या पेशे से आय :— किसी कारोबार या पेशे से होने वाला लाभ, व्यापार के तहत प्राप्त किया ब्याज, साझेदारी के पार्टनर को मिला वेतन या बोनस आदि आते हैं|

पूंजीगत लाभ के रूप में आय :— पूंजीगत लाभ के तहत कोई पूंजीगत संपत्ति की बिक्री से हुआ लाभ आता हैं| इसमें शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के पूंजीगत लाभ शामिल हैं.

अन्य स्रोत से आय :— बैंक डिपॉजिट और सिक्योरिटीज पर मिला ब्याज, शेयरों पर मिले लाभांश, रॉयल्टी इनकम, लॉटरी या रेस जीतने और उपहार के रूप में मिली रकम को अन्य स्रोत से आय माना जाता है

निगम कर Corporate Tax :- निगम कर एक एक ऐसा पत्रकार होता है निगम का संघ द्वारा लगाया जाता है यह कंपनी की आय पर लगाया जाता है तथा इसका भी नियोजन केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों द्वारा किया जाता है 

अप्रत्यक्ष कर :—

ऐसा कर ऐसे करो को अप्रत्यक्ष कर कहते हैं जिनका मौद्रिक बाहर दूसरों पर डाला जाता है अर्थात करापात किसी और व्यक्ति पर होता और कराघाट किसी और व्यक्ति पर होता है ।

अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) के प्रकार :—

  1. बिक्री कर (Sales Tax)
  2. सर्विस टैक्स (Service Tax)
  3. उत्पाद कर (Excise Duty)
  4. प्रोफेशनल टैक्स ( Professional Tax)
  5. लाभांश वितरण कर (Dividend distribution Tax)
  6. मनोरंजन कर (Entertainment Tax)
  7. संपत्ति कर (property Tax)
  8. स्टाम्प ड्यूटी/ कर (Stamp Duty)
  9. वैट कर (VAT)
  10. टोल कर (toll Tax)

बिक्री कर (Sales Tax) :— सरकार किसी भी सामान की खरीद-फरोख्त पर कर वसूलती है। भारत के ज्यादातर राज्यों मे अब बिक्री कर की जगह वैट ने ले ली है, लेकिन सेल्स टैक्स सेवाओं पर भी वसूला जाता है।

सर्विस टैक्स (Service Tax) :— सेवा कर यानि सर्विस टैक्स एक प्रकार का इनडायरेक्ट टैक्स होता है जो एक व्‍यक्ति द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर लिया जा जाता है। यह एक अप्रत्‍यक्ष कर है, चूंकि इसे सेवा प्रदाता द्वारा अपने व्‍यापार संबंधी लेन देनों में सेवा प्राप्‍त करने वाले व्‍यक्ति से वसूला जाता है।

उत्पाद कर (Excise Duty) :— एक अप्रत्‍यक्ष कर है जो भारत में विनिर्माण की जाने वाली उन वस्‍तुओं पर लगाया जाता है जो घरेलू खपत के लिए होती हैं। कर 'विनिर्माण' पर लगाया जाता है और जैसे ही वस्‍तुओं का विनिर्माण हो जाता है केन्‍द्रीय उत्‍पाद शुल्‍क देय हो जाता है। यह विनिर्माण पर लगाया गया कर है जो विनिर्माता द्वारा अदा किया जाता है, जो अपना कर भार ग्राहकों पर डाल देते हैं।

प्रोफेशनल टैक्स ( Professional Tax) :— प्रोफेशन टैक्स एक इन-डायरेक्ट टैक्स होता है जो उन लोगों पर लगता है जो या तो एक पेशेवर, नौकरीपेशा है या व्यापार टैक्सता है। इनकम टैक्स को केंद्रीय सरकार द्वारा लागू किया जाता है लेकिन प्रोफेशन टैक्स राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार द्वारा लगाया जाता है। अधिकतर भारत के राज्य प्रोफेशन टैक्स लगते हैं लेकिन सारे नहीं। कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य प्रोफेशन टैक्स लगाते हैं वहीँ दिल्ली और हरयाणा में ऐसा कोई टैक्स लागू नहीं होता है।

लाभांश वितरण कर (Dividend distribution Tax) :— भारत के आयकर अधिनियम के अनुच्छेद 115-ओ के तहत घरेलू कंपनी द्वारा लाभांश के रूप में कोई भी घोषित, वितरित या भुगतान की गई राशि लाभांश वितरण कर (Dividend distribution tax/DDT) के लिए करपात्र होगी। केवल घरेलू कंपनी (विदेशी कंपनी नहीं) ही इस कर के लिए करपात्र है।

मनोरंजन कर (Entertainment Tax) :— भारत में हर वित्तीय लेन- देन, जो मनोरंजन (Entertainment) से जुडी होती है ,जैसे:फिल्म टिकट, प्रमुख कमर्शियल शो या कोई बड़ा निजी त्यौहार, उनपे मनोरंजन कर (Entertainment Tax) लगता है। भारतीय संविधान के अनुसार, मनोरंजन कर सूचि २ के अंतर्गत आता है। इससे कमाया हुआ राजस्व आम तौर पर राज्य सरकार को जाता है।

संपत्ति कर (property Tax) :— वह प्रत्यक्ष कर राशि होती है, जो किसी अचल संपत्ति के स्वामी द्वारा उस संपत्ति के मूल्य के अनुसार अदा किया जाता है। इस कर का अनुमान संपत्ति मूल्य के आधार पर लगता है। इसमें यह महत्त्वपूर्ण नहीं होता कि उस संपत्ति से स्वामी को कोई लाभ हुआ है या नहीं। इस प्रकार मूल परिभाषा अनुसार संपत्ति कर नगर पालिकाओं द्वारा अपने अधिकारक्षेत्र में स्थित अचल सम्पत्ति के स्वामियों पर लगाया गया सामान्य कर होता है, जो उस संपत्ति के मूल्य पर आधारित होता है। यह कर मुख्यत: भूमि, भूमि सुधार, मानव द्वारा निर्मित चल वस्तु जैसे घर, मकान, दुकान, भवन इत्यादि पर लागू होता है

मूल्य वर्धित कर value added Tax :

यह एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है जो एक व्यवसाय सामान खरीदते समय अपने सप्लायर को देता है तथा सामान बेचते समय अपने ग्राहक से लेता है यह कर भारत में 1 अप्रैल 2005 से लागू हुआ लेकिन उत्तर प्रदेश में यह कर एक जनवरी 2008 से लागू हुआ था जब यह कर लागू नहीं हुआ था तो व्यापारी व्यापार कर को देता था मूल्य वर्धित कर को लागू करते समय इसके कुल 4 ग्रुप बनाए गए थे ।

Vat@ 1 % :- this is for a specific category of course like gold silver etc. jewelries and any metal part

Vat@ 4 % :- the largest number of goods comparison of basic necessity items such as drugs and medicine agriculture and industrial inputs capital goods and the declared goods are under 4% VAT rate 

Vat@ 12.5 % :- The remaining commodities are under the general VAT rate of of 12.5% example electric electronic FMCG (fast moving consumer goods) food products etc.

Vat@ 0 % Exempted From VAT :- there are about 46 commodities under the exempted category this includes a maximum of 10 commodities that each state would be allowed to select , from a border approved list for VAT exemption . The exempted commodities including natural and unprocessed products in unorganised sector as well as items , which are legally barred from taxation. 

USING MULTIPLE VAT  :

जब एक व्यापारी विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को खरीदते समय या बेचते समय विभिन्न प्रकार की श्रेणियों का मूल्य वर्धित कर पूर्ति कार को देता है क्या ग्राहक से लेता है तो उसे ही कई मूल्य वर्धित कर MULTIPLE VAT है कहते हैं ।

अन्य कर Other Tax :

डायरेक्ट और इनडायरेक्ट करों के अलावे छोटे उपकर भी होते हैं जो विभिन्न उप-श्रेणियों में आते हैं| आयकर अधिनियम के भीतर, इन करों को नियंत्रित करने वाले अलग-अलग कार्य हैं| अन्य कर मामूली राजस्व जनरेटर हैं और छोटे उपकर टैक्स हैं। 

अन्य करों की विभिन्न उप श्रेणियां इस प्रकार हैं:

प्रॉपर्टी टैक्स :— इसे रियल एस्टेट टैक्स या म्यूनिसिपल टैक्स भी कहा जाता है। आवासीय और वाणिज्यिक संपत्ति के मालिक संपत्ति कर के अधीन हैं। इसका उपयोग कुछ मूलभूत नागरिक सेवाओं के रखरखाव के लिए किया जाता है। प्रत्येक शहर में स्थित नगर निकायों द्वारा संपत्ति कर लगाया जाता है।

व्यावसायिक कर :— यह रोजगार कर उन लोगों पर लगाया जाता है जो किसी पेशे का अभ्यास करते हैं या एक वेतनभोगी आय जैसे वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट, डॉक्टर आदि कमाते हैं। यह कर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है। सभी राज्य व्यावसायिक कर नहीं लगाते हैं।

मनोरंजन कर :— यह वह कर है जो टेलीविजन श्रृंखला, फिल्मों, प्रदर्शनियों आदि पर लगाया जाता है। कर को कमाई से होने वाले सकल संग्रह पर लगाया जाता है।

पंजीकरण शुल्क, स्टांप शुल्क, स्थानांतरण कर :- ये संपत्ति खरीदने के समय या उसके बाद संपत्ति कर के पूरक के रूप में एकत्र किए जाते हैं।

शिक्षा उपकर :— यह भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए और बनाए गए शैक्षिक कार्यक्रमों को निधि देने के लिए लगाया जाता है।

एंट्री टैक्स :- यह वह कर है जो किसी राज्य में प्रवेश करने वाले उत्पादों या वस्तुओं पर लगाया जाता है, विशेष रूप से ई-कॉमर्स प्रतिष्ठानों के माध्यम से, और दिल्ली, असम, गुजरात, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में लागू होता है।

रोड टैक्स और टोल टैक्स :- यह टैक्स सड़कों और टोल इन्फ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव के लिए उपयोग किया जाता है।

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