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Double Entry System

 DOUBLE ENTRY SYSTEM (दोहरा लेखा प्रणाली)


ACCORDING TO R  C AGRWAL -   वही खाते की दोहरा लेखा प्रणाली उच्च प्राथमिक सिद्धांत पर आधारित है कि प्रत्येक लेनदेन के दो विभिन्न घाटों पर प्रभाव पड़ता है

MEANING AND DEFINITION OF DOUBLE ENTRY SYSTEM (दोहरा लेखा प्रणाली का अर्थ एवं परिभाषा

MEANING (अर्थ) - 

जैसा कि दोहरा लेखा प्रणाली नाम से यह स्पष्ट है कि इस प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक के लेनदेन का पुस्तकों में दो स्थानों पर अलग-अलग लेखा होता है अतः इसे दोहरा लेखा प्रणाली कहते हैं इस प्रणाली का मुख्य आधार यह है कि प्रत्येक के व्यापारिक लेन-देन के दो पक्ष या रूप होते हैं एक पक्ष लाभ पाने वाला होता है और दूसरा पक्ष लाभ देने वाला होता है अतः प्रत्येक लेनदेन के दोनों पक्षों में अलग-अलग लेखा किया जाता है दोहरा लेखा प्रणाली का अर्थ यह कदापि नहीं है कि एक ही लेनदेन का पुस्तकों में दो बार लेना किया जाए ।

DEFINITION (परिभाषा) - 

दोहरा लेखा प्रणाली के विद्वानों ने अलग-अलग परिभाषा दिया है जो कि इस प्रकार है 

बी जी विकरी के अनुसार - दोहरा लेखा प्रणाली के अनुसार प्रत्येक के लेनदेन में प्रत्येक के पाने वाले को प्राप्त राशि से डेबिट तथा देने वाले को उसी राशि से क्रेडिट किया जाता है ।

स्पाइसर तथा पैगलर के अनुसार - बुक कीपिंग की दोहरा लेखा प्रणाली लेनदेन को लिखने की वह पद्धति है जिसमें दो रूप होते हैं पहला मूल्य पाने वाला तथा दूसरा मूल्य देने वाला वह खाता जो मूल्य पाता है उसे डेबिट और जो मूल्य देता है उसे क्रेडिट करते हैं

एम जे किलर के अनुसार - लेखांकन की सर्व सामान्य प्रणाली दोहरा लेखा प्रणाली है जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि प्रत्येक  व्यवहार के लिए की गई प्रविष्टि के दो भाग होते हैं पहला डेबिट और दूसरा क्रेडिट 

CHARACTERISTICS FEATURES OF DOUBLE ENTRY SYSTEM (दोहरा लेखा प्रणाली के लक्षण अथवा विशेषताएं)

  • निश्चित नियमों पर आधारित होता है
  • यह एक न्याय संगत प्रणाली है
  • इसमें व्यक्तिगत एवं आ व्यक्तिगत दोनों प्रकार के व्यवहारों का लेखा होता है
  • इससे गणितीय शुद्धता का ज्ञान किया जाता है
  • व्यापार की आर्थिक स्थिति का ज्ञान भी यह करवाता है ।
  • यह एक वैज्ञानिक प्रणाली है।

OBJECT OF DOUBLE ENTRY SYSTEM (दोहरा लेखा प्रणाली के उद्देश्य)

  • यह व्यापार की वित्तीय स्थिति का ज्ञान करवाता है।
  • यह खातों की शुद्धता का जांच करता है।
  • यह लाभ हानि का भी ज्ञान करवाता है।
  • तथा यह वैधानिक अनिवार्यता की भी पूर्ति करता है ।

HISTORY OF DOUBLE ENTRY SYSTEM (दोहरा लेखा प्रणाली का इतिहास)

आधुनिक पुष्पांगल की दोहरा लेखा प्रणाली सबसे पहले इटली के उन व्यापारियों द्वारा प्रयोग में लाया गया था जो नीदरलैंड तथा इंग्लैंड तथा व्यापारियों से संपर्क रखते थे यही कारण है कि इसको इटालियन प्रणाली भी कहा जाता है इसका जन्म इटली से हुआ था विद्वानों के अनुसार दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धांत पर सर्वप्रथम सन 1494 में Lucas Pacioli नामक पादरी ने दी कमयूटटिसेट स्क्रिप्चर रेस नामक पुस्तक लिखी यह पुस्तक मुख्यता है बीजगणित पर लिखी गई थी इस पुस्तक की एक भाग में दोहरा लेखा सिद्धांत की विवेचना की गई थी इस पुस्तक का सन 1543 में Hugh old Cassel ने अंग्रेजी अनुवाद लंदन में प्रकाशित करवाया इतना होते ही श्री पैसेयोली के समय में 19वीं शताब्दी के अंतिम चरण तक इस प्रणाली में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ 19 में शताब्दी के बाद अंतिम चरण में औद्योगिक क्रांति के होने पर संसार के उद्योग तथा व्यापार में वृद्धि हुई फल स्वरूप हिसाब किताब की विधि का वैज्ञानिक रूप निश्चित करने की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी अतः इस प्रणाली में समय-समय पर सुधार किए गए

PRINCIPLES OF DOUBLE ENTRY SYSTEM (दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धांत)

दोहरा लेखा प्रणाली एक वैज्ञानिक पद्धति है इस प्रणाली के अनुसार लेखा करने में निश्चित स्पष्ट सिद्धांतों का पालन किया जाता है यह प्रणाली निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है

दो पक्ष - प्रत्येक व्यापारिक व्यवहारों में 251 पाने वाला होता है और एक दो देने वाला इन दोनों पक्षों के बिना कोई लेन-देन संभव नहीं होता है

दोनों खातों में लेखा - प्रत्येक सौदे मैं दोनों पक्ष प्रभावित होते हैं इसलिए इसका लेखा दोनों स्थानों पर किया जाता है

विपरीत पक्षों में लेखा  - इस प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक के खाते के दो भाग पहला डेबिट और दूसरा क्रेडिट पक्ष होते हैं खाते के बाय और भाग को डेबिट तथा दाएं और के भाग को क्रेडिट करते हैं

निश्चित नियम - उपयुक्त बातों के आधार पर प्रत्येक लेनदेन में पाने वाले के खाते को डेबिट तथा देने वाले खाते को क्रेडिट और लिखा जाता है

प्रत्येक व्यवहार का तीन क्रम में लेखा -  दोहरा लेखा प्रणाली के अंतर्गत समस्त व्यापारिक व्यवहारों का लेखा प्रमुख रूप से तीन अवस्था में किया जाता है 

  •   प्रारंभिक लेखा पुस्तकों में 
  •   वर्गीकृत हाथों में 
  •   अंतिम खाते तैयार करते समय

CLASSIFICATION OF ACCOUNTS (खातों का वर्गीकरण)

दोहरा लेखा प्रणाली के अंतर्गत समस्त खातों को निम्न तीन वर्गों में विभाजित किया जाता

व्यक्तिगत खाते - जिन खातों में किसी किसी व्यक्ति फॉर्म संस्था या कंपनी आदि के साथ पूरे लेनदेन का ले खा किया जाता है ।

वस्तुगत खाते - इन खातों का संबंध वस्तुओं से संबंधित लेनदेन से होता है

नाम मात्र - खाते वह खाता जिनमें आय व्यय लाभ हानि के संबंध में लेख किए जाते हैं नाम मात्र के खाते कहलाते हैं।

MERITS OF DOUBLE ENTRY SYSTEM (दोहरा लेखा प्रणाली के गुण)

  1. वैज्ञानिक प्रणाली
  2. पूर्ण लेखा
  3. तलपट का निर्माण
  4. व्यापार एवं लाभ हानि खाते का निर्माण
  5. वित्तीय स्थिति का ज्ञान
  6. वैधानिक मान्यता
  7. तुलनात्मक अध्ययन


विषय सूची (TABLE OF CONTENT)








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