Methods of valuation of stock
आर सी अग्रवाल के अनुसार - अंतिम रहतिय के मूल्यांकन हेतु विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता हैं किंतु श्रेष्ठठ विधि वह है जिसमें लागत मूल्य अथवा विक्रय मूल्य इनमेंं जो भी कम हो केेेेे सिद्धांत का पालन किया गया हो ।
रहतिया से आशय ( Meaning of Stock ) —
रहतिया से आशय व्यवसाय में बचे हुए स्टॉक से है । जो माल वर्ष के अन्त में बिकने से रह जाता है , वह रहतिया ' या अन्तिम रहतिया कहलाता है । इसमें सभी प्रकार की कच्ची सामग्री ,अद्धनिर्मित सामग्री ,निर्मित सामग्री , सहायक सामग्री ,प्रदाय पुर्जे तथा औजार आदि सम्मिलित होते हैं । रहतिया अथवा अन्तिम रहतिया के लिए इंग्लैण्ड में रहतिया अथवा स्टॉक तथा अमरीका में इनवैण्ट्री ( Inventory ) शब्द का प्रयोग करते हैं । भारत में इन दोनों शब्दों का समान रूप से प्रयोग होता है ।
प्रो . हैसमैन के शब्दों में - स्टॉक या रहतिया किसी भी प्रकार का निष्क्रिय साधन है बशर्ते इस प्रकार के संसाधन का कोई आर्थिक मूल्य हो । ” रहतिया निम्न दो प्रकार का होता है
1. प्रारम्भिक रहतिया ( Opening Stock ) - वर्ष के प्रारम्भ में जितना माल व्यवसाय में गत वर्ष में बिकने से बचा हुआ रहता है , वह ' प्रारम्भिक रहतिया ' कहलाता है । यह वह माल होता है जो पिछले वर्ष के अन्त में शेष था । इस माल को नये वर्ष में विक्रय हेतु प्रस्तुत किया जाता है । अतएव व्यापार खाते में डेबिट पक्ष में इसे क्रय से पूर्व दिखाया जाता है ।
2. अन्तिम रहतिया ( Closing Stock ) - वर्ष के अन्त में जो माल विक्रय होने से बच जाता है ,वह अन्तिम रहतिया कहलाता है । चूँकि इसका मूल्यांकन वर्ष की समाप्ति की तिथि के पश्चात् किया जाता है अतएव यह प्राय तलपट के बाहर ही दिखाया जाता है । यह समायोजन के रूप में होता है । अन्तिम रहतिया को समायोजन लेखे के लिए अन्तिम रहतिया खाता डेबिट तथा व्यापार खाता क्रेडिट किया जाता है
अन्तिम रहतिये की सूची तैयार करते समय ध्यान देने योग्य बातें ( POINTS TO BE KEPT IN MIND WHILE DRAFTING CLOSING STOCK LIST )
1. यदि कोई माल विक्रय एजेण्ट के पास विक्रय हेतु भेजा गया हो और उसके पास उसमें से कुछ माल बच गया हो तो उसे सूची में सम्मिलित कर लिया जाना चाहिए ।
2. यदि कोई माल बेचा जा चुका हो किन्तु क्रेता के पास किसी कारणवश नहीं भेजा गया हो तो ऐसे माल को सूची में सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए ।
3. यदि क्रय किया गया माल प्राप्त हो गया हो किन्तु उसे क्रय बही अथवा क्रय खाते में नहीं लिखा गया हो तो उसे सूची में सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए ।
4. यदि माल वापिस प्राप्त हो गया हो किन्तु उसकी प्रविष्टि विक्रय वापिसी पुस्तक में नहीं की गयी हो तो ऐसे माल को सूची में सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए । से
5. जो माल रखा - रखा खराब हो गया हो , उसकी अलग से सूची तैयार की जानी चाहिए और उसका घटी दर ही सूची में सम्मिलित करना चाहिए । मूल्य लगाकर
अन्तिम रहतिया ( स्टॉक ) मूल्यांकन विधियाँ ( Methods of Valuation of Closing Stock )
अन्तिम रहतिया मूल्यांकन की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं
- वास्तविक लागत मूल्यांकन विधि ( Actual Cost Valuation Method )
- पहले आना पहले जाना विधि ( First In First Out Method or FIFO
- अन्त में आना पहले जाना विधि ( Last In First Out Method or LIFO )
- उच्चतम आगम प्रथम जाना विधि ( Highest In First Out Method or HIFO )
- न्यूनतम आगम प्रथम जाना विधि ( Minimum In First Out Method or MIFO )
- औसत लागत विधि ( Average Cost Method )
- आधार रहतिया लागत विधि ( Base Stock Cost Method )
- प्रमापित मूल्य विधि ( Standard Price Method ) , 9.
- अन्तिम रहतिया अनुमानित विधि ( Closing Stock Approximation Method ) |
1. वास्तविक लागत मूल्यांकन विधि ( Actual Cost Valuation Method ) - अन्तिम रहतिये के मूल्यांकन की यह सबसे पुरानी एवं सरल विधि है । इसके अन्तर्गत अन्तिम रहतिये का मूल्यांकन वास्तविक लागत पर ही किया जाता है । जिस दिन माल क्रय किया जाता है , उसकी प्रविष्टि उसी दिन स्टॉक रजिस्टर में कर ली जाती है । मूल्य भी वही अंकित किया जाता है जिस मूल्य पर माल क्रय किया गया हो । जो माल शेष बचता है , उसका मूल्यांकन भी उसी मूल्य पर किया जाता है जिस पर वह वास्तव में क्रय किया गया हो । वास्तविक लागत मूल्यांकन विधि का उपयोग सामान्यतः लघु इकाइयों में किया जाता है ।
2. पहले आना पहले जाना विधि ( First In First Out Method or FIFO ) -
अन्तिम रहतिया मूल्यांकन की यह विधि इस मान्यता पर आधारित है कि जो माल पहले क्रय किया जाता है , उसको पहले ही निर्गमित किया जाता है । इसी प्रकार जो माल बाद में क्रय किया जाता है , उसका निर्गमन भी बाद में ही किया जाता है । दूसरे शब्दों में , जब तक पहले क्रय किया गया माल समाप्त नहीं हो जाता , तब तक उसके बाद में क्रय किये गये माल का निर्गमन नहीं किया जाता है । इस विधि के अन्तर्गत माल उसी मूल्य पर निर्गमित किया जाता है जिस मूल्य पर वह क्रय किया गया था , न कि वर्तमान मूल्य पर । सामान्यतः इस विधि का प्रयोग उसी अवस्था में किया जाता है जबकि माल का अधिक समय तक संग्रह करना सम्भव न हो ।
- यह विधि सरल है ।
- इसमें गणना करना सरल है
- यह विधि वैज्ञानिक है क्योंकि इसमें पहले क्रय किया गया माल पहले निर्गमित किया जाता है और बाद में क्रय किया गया माल बाद में निर्गमित किया जाता है ।
- इसमें अन्तिम रहतिया का मूल्यांकन बाजार मूल्य के निकट होता है ।
- रहतिया का भौतिक निर्गमन उसी क्रम में किया जाता है जिस क्रम में उसे क्रय किया गया हो । अतएव इस दृष्टि से यह विधि व्यावहारिक है ।
5.न्यूनतम आगम प्रथम जाना विधि ( Minimum In First Out Method or MIFO ) - इस विधि के अन्तर्गत सबसे पहले सबसे कम मूल्य पर क्रय किया गया माल निर्गमित किया जाता है और तत्पश्चात् उससे अधिक मूल्य पर क्रय किया गया माल निर्गमित किया जाता है । इस प्रकार यह विधि पहले की विधि से ठीक विपरीत विधि है । यह विधि इस मान्यता पर आधारित है कि प्रारम्भ में कम मूल्य वाले माल का प्रयोग करके लागत में कमी लाकर विक्रय में वृद्धि की जा सकती है । बाजार में प्रतिष्ठा भी स्थापित की जा सकती है ।
लाभ ( Merits )
- लागत में पर्याप्त कमी लायी जा सकती है ।
- विक्रय में वृद्धि जा सकती हो ।
- प्रतियोगिता का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है बाजार में प्रतिष्ठा स्थापित की जा सकती है ।
6.औसत लागत विधि ( Average Cost Method ) —
अन्तिम रहतिया निकालने की इस विधि के अन्तर्गत अन्तिम रहतियों का मूल्यांकन औसत लागत पर किया जाता है । इस विधि में जितनी बार भी माल क्रय किया जाता है ,उन सभी की क्रय मूल्य की दर को जोड़कर उसका औसत निकाल लेते हैं । इसमें क्रय की गयी मात्रा का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है तथा इसमें सामग्री का निर्गमन पहले आना ,पहले जाना पद्धति के आधार पर किया जाता है
लाभ ( Merits )
- यह एक सरल विधि है ।
- औसत दर से सभी विभागों के मूल्य पर समान प्रभाव पड़ता है
7. आधार रहतिया लागत विधि ( Base Stock Cost Method ) —
यह विधि इस मान्यता पर आधारित है कि प्रत्येक संस्था को रहतिया की एक न्यूनतम मात्रा सदैव अपने पास रखनी चाहिए । अतएव इस विधि के अन्तर्गत रहतिया की एक न्यूनतम मात्रा सदैव स्टॉक में रहती है । उसे निर्गमित नहीं किया जाता है । इसे आधार रहतिया लागत विधि कहते हैं । इस न्यूनतम रहतिये को छोड़कर शेष रहतियों का निर्गमन पहले आना पहले जाना विधि ( FIFO ) अथवा अन्त में आना पहले जाना विधि ( LIFO ) के आधार पर किया जा सकता है ।
उदाहरण - भारत एण्ड कम्पनी ,वाराणसी की निम्न सूचनाओं से आधार रहतिया लागत विधि के आधार पर निर्गमित माल तथा अन्तिम माल का मूल्यांकन कीजिए तथा यह मानिये कि सामग्री का निर्गमन FIFO के आधार पर किया गया है
अन्तिम रहतिया का मूल्यांकन करते समय ध्यान देने योग्य बातें ( POINTS TO BE KEPT IN MIND WHEN VALUATING CLOSING STOCK )
अन्तिम रहतिया के मूल्यांकन में निम्न बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए
रहतिया से आशय ( Meaning of Stock ) —
रहतिया से आशय व्यवसाय में बचे हुए स्टॉक से है । जो माल वर्ष के अन्त में बिकने से रह जाता है , वह रहतिया ' या अन्तिम रहतिया कहलाता है । इसमें सभी प्रकार की कच्ची सामग्री ,अद्धनिर्मित सामग्री ,निर्मित सामग्री , सहायक सामग्री ,प्रदाय पुर्जे तथा औजार आदि सम्मिलित होते हैं । रहतिया अथवा अन्तिम रहतिया के लिए इंग्लैण्ड में रहतिया अथवा स्टॉक तथा अमरीका में इनवैण्ट्री ( Inventory ) शब्द का प्रयोग करते हैं । भारत में इन दोनों शब्दों का समान रूप से प्रयोग होता है ।
प्रो . हैसमैन के शब्दों में - स्टॉक या रहतिया किसी भी प्रकार का निष्क्रिय साधन है बशर्ते इस प्रकार के संसाधन का कोई आर्थिक मूल्य हो । ” रहतिया निम्न दो प्रकार का होता है
1. प्रारम्भिक रहतिया ( Opening Stock ) - वर्ष के प्रारम्भ में जितना माल व्यवसाय में गत वर्ष में बिकने से बचा हुआ रहता है , वह ' प्रारम्भिक रहतिया ' कहलाता है । यह वह माल होता है जो पिछले वर्ष के अन्त में शेष था । इस माल को नये वर्ष में विक्रय हेतु प्रस्तुत किया जाता है । अतएव व्यापार खाते में डेबिट पक्ष में इसे क्रय से पूर्व दिखाया जाता है ।
2. अन्तिम रहतिया ( Closing Stock ) - वर्ष के अन्त में जो माल विक्रय होने से बच जाता है ,वह अन्तिम रहतिया कहलाता है । चूँकि इसका मूल्यांकन वर्ष की समाप्ति की तिथि के पश्चात् किया जाता है अतएव यह प्राय तलपट के बाहर ही दिखाया जाता है । यह समायोजन के रूप में होता है । अन्तिम रहतिया को समायोजन लेखे के लिए अन्तिम रहतिया खाता डेबिट तथा व्यापार खाता क्रेडिट किया जाता है
अन्तिम रहतिये की सूची तैयार करते समय ध्यान देने योग्य बातें ( POINTS TO BE KEPT IN MIND WHILE DRAFTING CLOSING STOCK LIST )
1. यदि कोई माल विक्रय एजेण्ट के पास विक्रय हेतु भेजा गया हो और उसके पास उसमें से कुछ माल बच गया हो तो उसे सूची में सम्मिलित कर लिया जाना चाहिए ।
2. यदि कोई माल बेचा जा चुका हो किन्तु क्रेता के पास किसी कारणवश नहीं भेजा गया हो तो ऐसे माल को सूची में सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए ।
3. यदि क्रय किया गया माल प्राप्त हो गया हो किन्तु उसे क्रय बही अथवा क्रय खाते में नहीं लिखा गया हो तो उसे सूची में सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए ।
4. यदि माल वापिस प्राप्त हो गया हो किन्तु उसकी प्रविष्टि विक्रय वापिसी पुस्तक में नहीं की गयी हो तो ऐसे माल को सूची में सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए । से
5. जो माल रखा - रखा खराब हो गया हो , उसकी अलग से सूची तैयार की जानी चाहिए और उसका घटी दर ही सूची में सम्मिलित करना चाहिए । मूल्य लगाकर
अन्तिम रहतिया ( स्टॉक ) मूल्यांकन विधियाँ ( Methods of Valuation of Closing Stock )
अन्तिम रहतिया मूल्यांकन की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं
- वास्तविक लागत मूल्यांकन विधि ( Actual Cost Valuation Method )
- पहले आना पहले जाना विधि ( First In First Out Method or FIFO )
- अन्त में आना पहले जाना विधि ( Last In First Out Method or LIFO )
- उच्चतम आगम प्रथम जाना विधि ( Highest In First Out Method or HIFO )
- न्यूनतम आगम प्रथम जाना विधि ( Minimum In First Out Method or MIFO )
- औसत लागत विधि ( Average Cost Method )
- आधार रहतिया लागत विधि ( Base Stock Cost Method
- प्रमापित मूल्य विधि ( Standard Price Method )
- अन्तिम रहतिया अनुमानित विधि ( Closing Stock Approximation Method ) |
1. वास्तविक लागत मूल्यांकन विधि ( Actual Cost Valuation Method ) -
अन्तिम रहतिये के मूल्यांकन की यह सबसे पुरानी एवं सरल विधि है । इसके अन्तर्गत अन्तिम रहतिये का मूल्यांकन वास्तविक लागत पर ही किया जाता है । जिस दिन माल क्रय किया जाता है , उसकी प्रविष्टि उसी दिन स्टॉक रजिस्टर में कर ली जाती है । मूल्य भी वही अंकित किया जाता है जिस मूल्य पर माल क्रय किया गया हो । जो माल शेष बचता है , उसका मूल्यांकन भी उसी मूल्य पर किया जाता है जिस पर वह वास्तव में क्रय किया गया हो । वास्तविक लागत मूल्यांकन विधि का उपयोग सामान्यतः लघु इकाइयों में किया जाता है ।
2. पहले आना पहले जाना विधि ( First In First Out Method or FIFO ) -
अन्तिम रहतिया मूल्यांकन की यह विधि इस मान्यता पर आधारित है कि जो माल पहले क्रय किया जाता है , उसको पहले ही निर्गमित किया जाता है । इसी प्रकार जो माल बाद में क्रय किया जाता है , उसका निर्गमन भी बाद में ही किया जाता है । दूसरे शब्दों में , जब तक पहले क्रय किया गया माल समाप्त नहीं हो जाता , तब तक उसके बाद में क्रय किये गये माल का निर्गमन नहीं किया जाता है । इस विधि के अन्तर्गत माल उसी मूल्य पर निर्गमित किया जाता है जिस मूल्य पर वह क्रय किया गया था , न कि वर्तमान मूल्य पर । सामान्यतः इस विधि का प्रयोग उसी अवस्था में किया जाता है जबकि माल का अधिक समय तक संग्रह करना सम्भव न हो ।
- यह विधि सरल है ।
- इसमें गणना करना सरल है
- यह विधि वैज्ञानिक है क्योंकि इसमें पहले क्रय किया गया माल पहले निर्गमित किया जाता है और बाद में क्रय किया गया माल बाद में निर्गमित किया जाता है ।
- इसमें अन्तिम रहतिया का मूल्यांकन बाजार मूल्य के निकट होता है ।
- रहतिया का भौतिक निर्गमन उसी क्रम में किया जाता है जिस क्रम में उसे क्रय किया गया हो । अतएव इस दृष्टि से यह विधि व्यावहारिक है ।
5.न्यूनतम आगम प्रथम जाना विधि ( Minimum In First Out Method or MIFO ) -
इस विधि के अन्तर्गत सबसे पहले सबसे कम मूल्य पर क्रय किया गया माल निर्गमित किया जाता है और तत्पश्चात् उससे अधिक मूल्य पर क्रय किया गया माल निर्गमित किया जाता है । इस प्रकार यह विधि पहले की विधि से ठीक विपरीत विधि है । यह विधि इस मान्यता पर आधारित है कि प्रारम्भ में कम मूल्य वाले माल का प्रयोग करके लागत में कमी लाकर विक्रय में वृद्धि की जा सकती है । बाजार में प्रतिष्ठा भी स्थापित की जा सकती है ।
लाभ ( Merits )
- लागत में पर्याप्त कमी लायी जा सकती है ।
- विक्रय में वृद्धि जा सकती हो ।
- प्रतियोगिता का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है बाजार में प्रतिष्ठा स्थापित की जा सकती है ।
6.औसत लागत विधि ( Average Cost Method ) —
अन्तिम रहतिया निकालने की इस विधि के अन्तर्गत अन्तिम रहतियों का मूल्यांकन औसत लागत पर किया जाता है । इस विधि में जितनी बार भी माल क्रय किया जाता है ,उन सभी की क्रय मूल्य की दर को जोड़कर उसका औसत निकाल लेते हैं । इसमें क्रय की गयी मात्रा का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है तथा इसमें सामग्री का निर्गमन पहले आना ,पहले जाना पद्धति के आधार पर किया जाता है
लाभ ( Merits )
- यह एक सरल विधि है ।
- औसत दर से सभी विभागों के मूल्य पर समान प्रभाव पड़ता है
7. आधार रहतिया लागत विधि ( Base Stock Cost Method ) — यह विधि इस मान्यता पर आधारित है कि प्रत्येक संस्था को रहतिया की एक न्यूनतम मात्रा सदैव अपने पास रखनी चाहिए । अतएव इस विधि के अन्तर्गत रहतिया की एक न्यूनतम मात्रा सदैव स्टॉक में रहती है । उसे निर्गमित नहीं किया जाता है । इसे आधार रहतिया लागत विधि कहते हैं । इस न्यूनतम रहतिये को छोड़कर शेष रहतियों का निर्गमन पहले आना पहले जाना विधि ( FIFO ) अथवा अन्त में आना पहले जाना विधि ( LIFO ) के आधार पर किया जा सकता है ।
उदाहरण - भारत एण्ड कम्पनी ,वाराणसी की निम्न सूचनाओं से आधार रहतिया लागत विधि के आधार पर निर्गमित माल तथा अन्तिम माल का मूल्यांकन कीजिए तथा यह मानिये कि सामग्री का निर्गमन FIFO के आधार पर किया गया है
अन्तिम रहतिया का मूल्यांकन करते समय ध्यान देने योग्य बातें ( POINTS TO BE KEPT IN MIND WHEN VALUATING CLOSING STOCK ) :
अन्तिम रहतिया के मूल्यांकन में निम्न बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए -
- स्टॉक में बची हुई प्रत्येक वस्तु को सूची में सम्मिलित कर लेना चाहिए ।
- प्रत्येक वस्तु की नाप ,तौल या संख्या सही सही लिखी जानी चाहिए ।
- जो माल किसी एजेण्ट के पास बिना बिका बचा हुआ है , उसे भी स्टॉक सूची में सम्मिलित कर लेना चाहिए ।
- जो माल व्यापार में खरीद लिया गया है तथा जिसके क्रय की प्रविष्टि पुस्तकों में कर ली गयी है किन्तु जो चालू वर्ष के अन्त तक प्राप्त नहीं हुआ है ,उसे भी स्टॉक सूची में सम्मिलित कर लेना चाहिए ।
- जो माल ग्राहक को बेचा जा चुका है एवं विक्रय बही में तत्सम्बन्धी लेखा कर लिया गया है किन्तु चालू वर्ष के अन्त तक ग्राहक को माल की सुपुर्दगी नहीं दी गयी है , उसे स्टॉक सूची में सम्मिलित नहीं करना चाहिए ।
- जो माल पसन्दी पर बिक्री के आधार पर किसी ग्राहक को भेजा गया है तथा चालू वर्ष के अन्त तक उस ग्राहक ने उसके क्रय का निर्णय नहीं लिया है तो ऐसे माल को भी स्टॉक सूची में सम्मिलित करना चाहिए ।
- बिका हुआ माल ,जो वापस आ गया है , को स्टॉक सूची में सम्मिलित करना चाहिए ।
- यदि किसी अन्य व्यक्ति का माल हमारे व्यापार में रखा हो तो उसे सूची में सम्मिलित नहीं करना चाहिए ।
- स्थायी सम्पत्तियों, जैसे — फर्नीचर ,मशीनरी व मोटर गाड़ी आदि को सूची में सम्मिलित नहीं करना चाहिए