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GENERAL BANKING TRANSACTION AND ACCOUNTS RELATING TO CHEQUE

 GENERAL BANKING TRANSACTION AND ACCOUNTS RELATING TO CHEQUE (साधारण बैंकिंग संबंधी व्यवहार एवं चेक संबंधी लेखें )


आरसी अग्रवाल के अनुसार - बैंक वह संस्था है जो मुद्रा एवं साख पत्रों में कारोबार करती है।

INTRODUCTION (प्रारंभिक ) - 

आधुनिक वाणिज्य युग में शुद्र बैंकिंग व्यवस्था का अपना विशिष्ट महत्त्व है किसी भी देश की आर्थिक सामाजिक उन्नति तथा व्यापारिक औद्योगिक प्रगति वहां के बैंकों के सक्रिय योगदान पर निर्भर करती है अतः बैंकों को व्यापार आत्मा कहा जाता है वर्तमान में बैंकों का कार्य ना केवल रुपया जमा करना अथवा ऋण प्रदान करना है अभी तू बैंक के क्षेत्र में चाहे कृषि हो या व्यापार अथवा उद्योग में धन की सुरक्षा धन का हस्तांतरण तथा पूंजी निर्माण में भी कार्य करती है

 DEFINITION OF BANK (बैंक की परिभाषा) - 

बैंक की परिभाषा विभिन्न विद्वानों ने विभिन्न प्रकार से दी है।

किनले के अनुसार - बैंक व संस्था है जो आवश्यकता पड़ने पर उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर लोगों को धन उधार देती है तथा जब लोगों को धन की आवश्यकता नहीं रहती है तो वह अपने अतिरिक्त धन को उसके पास जमा करते हैं।

भारतीय बैंकिंग कंपनी अधिनियम 1949 के अनुसार - बैंक या बैंकिंग से तात्पर्य रेड देने अथवा विनियोग के आशय जनता से जमाई प्राप्त करना जो की मांग पर भूतान योग्य होती हैं चेक ग्राहक अथवा अन्य प्रकार की आज्ञा द्वारा शोधनी होती हैं

CONCLUSION ( निष्कर्ष ) - 

इन दोनों महत्वपूर्ण परिभाषा ओं के अतिरिक्त बहन की की और भी परिभाषाएं दीजिए सभी परिभाषा ओं के अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर हम कह सकते हैं कि बैंक वह संस्था है जो मुद्रा का आदान प्रदान करती है बैंक ऐसे व्यक्तियों से जमा पर मुद्रा लेती है जिनके पास हुए उनकी आवश्यकता से अधिक है इसके लिए बैंक उन्हें ब्याज भी देती है एकत्र कर देती है उसे अधिकारियों में लगा सकते हैं और अधिक ब्याज पर उधार और यह ब्याज का अंतर का लाभ होता है।।

FUNCTION OF A BANK (बैंक के कार्य)

उपर्युक्त परिभाषा से यह स्पष्ट हुआ है कि बैंक मुख्यतः दो प्रकार से कार्य करते हैं।

  1. जनता से जमा पर रुपया उधार प्राप्त करना
  2. जनता को रुपया उधार देना

बैंक उपर्युक्त प्रमुख कार्यों के अतिरिक्त अपने ग्राहकों को अनेक सेवाएं प्रदान करती हैं कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं निम्न प्रकार हैं ।


  1. चेक अथवा ड्राफ्ट द्वारा रुपया सुगमता पूर्वक एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना।
  2. ग्राहकों के लिए उनकी प्रतिभूतियों पर ब्याज वाला मांस आदि दूसरे संस्थानों से प्राप्त कर ग्राहक के खाते में जमा करना।
  3. ग्राहक के अस्थाई आदेशों पर उनकी ओर से बीमा प्रीमियम किराया कर जल विद्युत बिल आदि का भुगतान करना।
  4. चेक विपत्र प्रतिज्ञापत्र कुंडिया आदि को भुनाना।
  5. व्यापारिक सूचनाओं एवं आंकड़ों को एकत्र करना

ACCOUNTS TO BE OPENED IN BANK (बैंक में खोले जाने वाले खाते) - 

बैंक में मुख्यतः तीन प्रकार के खाते ही खोले जाते हैं जो कि इस प्रकार है । 

1. सावधि या मियादी खाता - इसे निश्चित कालीन निक्षेप भी कहते हैं सावन खाते में एक निश्चित अवधि के लिए रुपए जमा किया जाता है निश्चित अवधि के पूर्व रुपए निकालने पर बैंक की सूचना देनी होगी बैंक कुछ धनराशि काट कर भुगतान कर देता है कृपया जमा कराते समय बैंक ग्राहक को एक रसीद देता है जिसे जमा की रसीद कहते हैं इस खाते पर बैंक अधिकतर से ब्याज देता है।

2. बचत बैंक खाता  - बैंकों द्वारा इस प्रकार के खाते खोले जाने की सुविधा प्रदान करने का उद्देश्य साधारण जनता में वित्त बेटा की आदत को प्रोत्साहन देकर उनके जमा धन को सुरक्षित प्रदान करना है अतः इस खाते में सर्व साधारण व्यक्ति अपनी बचत की छोटी-छोटी राशियों को समय समय पर जमा कर आते रहते हैं इस खाते को वर्तमान में कम से कम 1000 जमा कराकर खोला जाता है तथा इस खाते पर चार परसेंट वार्षिक दर से ब्याज दिया जाता है।

3. चालू खाता - यह खाता व्यापारियों के लिए सर्वाधिक उपयोगी हैं इस खाते में दिन में कितने ही बार रुपया जमा किया जा सकता है इस खाते में एक न्यूनतम राशि से स्वस्थ रहने चाहिए इस प्रकार की खाते पर समानता है बैंक द्वारा कोई ब्याज नहीं दिया जाता है अभी तो कभी-कभी न्यूनतम राशि के शेष से कम सेस रह जाने पर बैंक प्रभार के रूप में कुछ राशि वसूल करती है

चालू खाता खोलने की विधि - व्यापारी जिस बैंक में खाता खोलना चाहता है उसे बैंक से उसे खाता खोलने का आवेदन फॉर्म निशुल्क प्राप्त करके भरकर देना होगा आवेदन फॉर्म में खाता खोलने वाले का नाम पता व्यवसाय की जानकारी तथा ऐसे व्यक्ति द्वारा परिचय पाएंगे का पूर्व ग्राहक है आदि देना पड़ता है  ।

MEANING OF CHEQUES (चेक अथवा धनादेश से आशय)

चेक अथवा धनादेश जमा करता द्वारा हस्ताक्षर युक्त एक शर्त रहित लिखित आदेश पत्र है जो एक निश्चित बैंक पर जिसमें लेखक का खाता है लिखा जाता है जिसमें मांगने पर एक निश्चित धनराशि स्वयं को वाह को या चेक में उल्लेखित व्यक्ति को उसकी आदेशानुसार किसी अन्य व्यक्ति को देने का आदेश दिया जाता है।

PARTIES OF A CHEQUES (चैक के पक्षकार) - 

बैक के निम्नलिखित तीन पक्ष होते है 

1. चैक का आहर्ता ( Drawer ) यह वह व्यक्ति होता है जिसका कि चारतव में बैंक में खाता होता है तथा चैक पर बैंक को भुगतान करने का आदेश देता है ।

 2. आहार्यो ( Drawee ) यह वह बैक होता है जिस के नाम का चैक होता है या जिस बैंक को बैंक का भुगतान करने का आदेश दिया जाता है । 

 3. आदाता या प्राप्तकर्ता ( Payee ) — यह वह व्यक्ति होता है जो चैक का भुगतान प्राप्त करता है । यदि कोई चैक स्वयं को देय हो तो चैक का लेखक ( आदेशक ) ही उसका आदाता होगा । 

 USE OF CHEQUES (चैक के उपयोग) -  

चैक के निम्नलिखित तीन उपयोग है 

  1.  चैक का भुगतान सम्बन्धित बैंक से नकद प्राप्त किया जा सकता है ।  
  2. किसी अन्य पक्ष को उसके भुगतान में बेचान ( Endorse ) किया जा सकता है ।
  3. अपने खाते में जमा कराया जा सकता है अथवा बैंक को संग्रह हेतु भेजा जा सकता है । 

TYPES OF CHEQUES (चैक के प्रकार) - 

चैक दो प्रकार के होते हैं

1 - वाहक या धनीजोग ( Bearer ) चैक - वाहक चैक का भुगतान किसी भी व्यक्ति को जो उसे बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत करता है कर दिया जाता है । ऐसे चैक में पाने वाले के नाम के आगे ' वाहक को ' ( or Bearer ) शब्द लिखे रहते हैं । ऐसे चैक पर बेचान करने की आवश्यकता नहीं होती । सुपुर्दगी मात्र से इसका हस्तान्तरण पूर्ण हो जाता है । ये चैक असुरक्षित रहते है क्योकि कोई भी व्यक्ति इस चैक का भुगतान प्राप्त कर सकता है ।

2 - आदेशित या नामजोग ( Order ) चैक - आदेशित चैक का भुगतान उसी व्यक्ति को जिसका नाम चैक में निर्दिष्ट किया गया है या उसके आदेशानुसार किसी अन्य व्यक्ति को किया जाता है । ऐसे चैक में प्राप्तकर्ता के नाम के आगे for Order ' शब्द लिखे रहते हैं । ऐसे चैक का हस्तान्तरण बेचान ( Endorsement ) द्वारा ही किया जा सकता है । 

CROSSING OF A CHEQUES (चैक का रेखांकन) -  भुगतान प्राप्त करने की दृष्टि से चैक दो प्रकार के हो सकते है 

  1. खुला चैक
  2. रेखांकित या रेखित चैक ( Crossed Cheque ) । 

( i ) खुला चैक ( Open Cheque ) - खुले चैक का भुगतान उस चैक के बैंक में प्रस्तुत करने वाले किसी भी व्यक्ति को किया जा सकता है । 

( ii ) रेखांकित चैक ( Crossed Cheque ) - रेखांकित चैक से आशय उस चैक से है जिसके मुख पृष्ठ पर दो तिरछी समानान्तर रेखाएँ बिना कुछ शब्दों के अथवा कुछ शब्दों सहित खौच दी गयी हो । रेखांकन का यह प्रभाव होता है कि उस चैक का भुगतान नकद बैंक की खिड़की से प्राप्त नहीं किया जा सकता अपितु ऐसे चैक का भुगतान किसी बैंक के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है । इस प्रकार के चैक अधिक सुरक्षित रहते हैं क्योंकि ऐसे चैक का भुगतान किसी गलत व्यक्ति को हो जाने पर उसका पता सरलता से लगाया जा सकता है । यह आवश्यक नहीं है कि चैक का लेखक ही चैक पर रेखांकन करे । कोई भी व्यक्ति जो चैक का धारक हो , चैक का रेखांकन कर सकता है । 

TYPES OF CROSSING (रेखांकन के प्रकार) - 

चैक पर रेखांकन ( Crossing ) दो प्रकार से किया जा सकता है : 

1. साधारण रेखांकन ( General Crossing ) - जब रेखाक में दोनों तिरछी रेखाओं के बीच में कुछ नहीं लिखा जाता या & Co ' , ' Not Negotiable ' , ' A / c Payee Only ' शब्द लिख दिये जाते हैं तो ऐसे रेखांकन को साधारण रेखांकन General Crossing ) कहते हैं । 

2. अविनिमयसाध्य ( Not Negotiable ) - रेखांकन के बीच अविनिमयसाध्य ' ( Not Negotiable ) शब्द लिख जाने से निमयसाध्य प्रपत्रों का एक विशेष गुण समाप्त हो जाता है अर्थात् ये शब्द लिखने का तात्पर्य होगा कि चैक का बेचान करने जा अपने से अच्छे अधिकार बेचान प्राप्तकर्ता को नहीं देता है । दूसरे शब्दों में , यदि बेचान करने वाले के अधिकार चैक के प्रति बत हैं तो बेचान प्राप्तकर्ता के अधिकार भी दूषित समझे जायेंगे ।

3.  केवल प्राप्तकर्ता के खाते में ( A Payee Only ) - रेखांकन के मध्य केवल प्राप्तकर्ता के खाते में ( Aic Payee 1y ) शब्द के लिखने का तात्पर्य यह होता है कि ऐसे चैक का रुपया उस व्यक्ति के खाते में ही जमा किया जा सकता है जो ने बैंक द्वारा भुगतान करने वाले बैक के पास प्रस्तुत करता है । ऐसे चैक का आगे बेचान नहीं किया जा सकता ।

DISHONOUR OF A CHEQUES (चैक का अनादरण) -

 सामान्यतया जब कभी कोई ग्राहक अपने बैंक पर चैक लिखता है तो उसका भुगतान करना बैंक के लिए अनिवार्य होता लेकिन कभी - कभी बैंक चैक को बिना भुगतान किये ही लौटा देते हैं  वे ऐसा तभी करते हैं जब इसके लिए पर्याप्त कारण हो ऐसी स्थिति में बैंक जिन कारणों से चैक का अनादरण करता है उनका उल्लेख चैक पर करके चैक को वापस कर देता है । वे कारण अग्रलिखित हो सकते हैं 

 1. चैक लिखने वाले व्यक्ति के खाते में चैक का भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन न होना । 

2. चैक पर अंकों तथा अक्षरों में लिखी धनराशि में अन्तर होना । 

3. लिखने वाले से चैक का भुगतान रोकने की लिखित आज्ञा प्राप्त होना । 

4. चैक पर आगे की तारीख पड़ी होना । 

5. चैक पर 3 माह से पूर्व की तारीख पड़ी होना । 

6. चैक पर बेचान अनियमित होना । 

7.चैक पर परिवर्तनों पर लेखक के हस्ताक्षर न होना । 

8. लेखक के हस्ताक्षरों का नमूने के हस्ताक्षरों से न मिलना ।

9. चैक पर कोई आवश्यक बात लिखने से छूट जाना । 10. चैक विकृत होना । 

11. चैकों का संग्रह न हो सकने के कारण खाते में पर्याप्त धनराशि न होना । 

12.लेखक द्वारा खाता बन्द कर देना । 

13. बैंक को लेखक की मृत्यु का समाचार प्राप्त होना । 14. बैंक को लेखक के पागल या दिवालिया होने की सूचना मिलना । 

15. सरकार से भुगतान रोकने का आदेश प्राप्त होना । 



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